Saturday, September 11, 2010

Jindagi - Samajh Samajh ka Faer... !

ख़ुशी मिली, तो खा गए, मिठाई समझ के,
जो ग़म मिला, तो खा गए, दवाई समझ के !

किया दोस्तों को माफ़, बवाफ़ाई समझ के,
दुश्मनों को भी दी माफ़ी , छोटा भाई समझ के !

अच्छा वक़्त काटा, हुनर नाई समझ के,
बुरे वक़्त को भी काट दिया, कसाई समझ के !

सारी मौजों को निभा गए, शहनाई समझ के,
मुसीबतों को भी निभा गए, बूढ़ी माई समझ के !

मिली दाद, तो भुला दिया बढ़ाई समझ के,
जो तोहमत लगी, भुला दिया लड़ाई समझ के !

जिंदगी को चख़ लिया  मलाई समझ के,
मौत को भी चख लिया रिहाई समझ के !

बेशक़ वाकिफ थे, नतीजा-ए-जिंदगी 'मजाल',
पर सारे इम्तिहाँ दिए , पढ़ाई समझ के !